India’s defence stronger than ever as the Govt is bolstering it with Indianness: Rajnath Singh

“Armed Forces equipped, capable & ready to give a befitting reply to anyone who casts an evil eye”

New Delhi : “India’s defence apparatus is today stronger than ever as the Government, led by Prime Minister Shri Narendra Modi, is focusing on bolstering it with the sentiment of Indianness,” said Raksha Mantri Shri Rajnath Singh at a Defence Summit organised by a private media organisation in New Delhi on March 07, 2024.
He termed ‘perspective’ as the major difference between the current and the previous dispensations, stating that the present government ardently believes in the capabilities of the people of India, while those in power earlier were somewhat skeptical about their potential.Shri Rajnath Singh described promoting ‘Aatmanirbharta’ in defence manufacturing as the biggest change brought about by the Government, which is giving a new shape to India’s defence sector.
He enumerated the reformative steps taken by the Ministry of Defence to achieve self-reliance, including setting up of Defence Industrial Corridors in Uttar Pradesh & Tamil Nadu; notification of positive indigenisation lists; reserving 75% of capital procurement budget for domestic industry; corporatisation of Ordnance Factory Board; and schemes/initiatives such as Innovations for Defence Excellence (iDEX), iDEX Prime, Acing Development of Innovative Technologies with iDEX (ADITI) & Technology Development Fund (TDF).
Highlighting the positive impact on the defence sector due to these decisions, Shri Rajnath Singh said: “The annual defence production, which was around Rs 40,000 crore in 2014, has now crossed a record Rs 1.10 lakh crore. The defence exports today have touched Rs 16,000 crore from a meagre Rs 1,000 crore nine-ten years ago. We have set a target to achieve Rs 50,000 crore of exports by 2028-29,” he said.
The Raksha Mantri emphasised that the country’s defence system has been induced with a new energy by the Government, as per the vision of the people of the country. This, he said, has resulted in India emerging as a powerful nation on the global stage with a strong and self-reliant military.
Today, our forces possess a strong will power due to a powerful leadership at the centre. We are working continuously towards keeping the morale of the soldiers high. They are equipped, capable and ready to give a befitting reply to anyone who casts an evil eye on India,” he said.
Rajnath Singh added that the Government has provided an ideal environment to the private sector while trusting the youth and promoting their innovation. “If our young ignited minds take one step forward, we will help them by taking 100 steps. If they take 100 steps, we will take 1,000 steps forward,” he said.
The Raksha Mantri asserted that when it comes to technology, developing countries have two options – ‘innovation’ & ‘imitation’ – and the Government is laying special emphasis on making the country technology creator rather than a follower.
“Imitating technology from developed countries is not wrong for those whose innovation capacity and human resource have not reached the level required to produce new technologies. If a country imitates technology from other nations, it still moves ahead from old technology; however, the problem is that one becomes addicted to imitation and gets used to second class technology.
This forces them to fall 20-30 years behind a developed country. Losing the national self-confidence is a bigger problem as one always remains a technology follower. This mentality comes into your culture, ideology, literature, lifestyle and philosophy. Prime Minister Shri Narendra Modi calls this follower mentality as the mindset of slavery,” he said.
Shri Rajnath Singh termed it as the duty of the Government, media as well as intelligentsia to guide the nation out of the mindset of slavery. He recalled the Prime Minister’s Independence Day address wherein he appealed to the people to shed the mentality of slavery and feel proud of the national heritage. “We should possess the knowledge about others, but we must be aware of our national heritage too, and feel proud of it,” the Raksha Mantri said,
Shri Rajnath Singh listed out the steps taken by the Government to shed the colonial mindset, including the introduction of Bharatiya Nyaya Sanhita in place of the Indian Penal Code. “We strengthened the faith of the youth in the culture of the country.
We rekindled Indianness in India. Our belief not only changed the way one sees history, but also rekindled the dreams of the youth studying in IITs, IIMs as well as other prestigious universities in India. Instead of seeking greener pastures abroad, the youth today is contributing to the Indian economy through start-ups and innovation within the country,” he said.
Highlighting the harmony between military power and spirituality prevalent in the Indian culture since centuries, the Raksha Mantri emphasised that the Government has been consistently working for the betterment of the serving & retired personnel as well as those who made the supreme sacrifice in the service of the nation, along with their families.
The Armed Forces are being modernised with latest state-of-the-art weapons/platforms. We established the National War Memorial in New Delhi to honour the sacrifices of the bravehearts. In addition, we implemented the One Rank One Pension scheme, a long-pending demand of the ex-servicemen,” he said.

भारत की सुरक्षा पहले से कहीं अधिक सशक्त है क्योंकि भारत सरकार इसे भारतीयता के साथ मजबूत बना रही है : राजनाथ सिंह
भारतीय सशस्त्र बल देश पर बुरी नजर डालने वाले को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए सुसज्जित, सक्षम और तैयार हैं

नई दिल्ली

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत का रक्षा तंत्र आज पहले से कहीं अधिक सशक्त है क्योंकि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार इसे भारतीयता की भावना के साथ मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। वे नई दिल्ली में 07 मार्च, 2024 को एक निजी मीडिया संगठन द्वारा आयोजित रक्षा शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
रक्षा मंत्री ने इस ‘परिप्रेक्ष्य’ को वर्तमान सरकार तथा पिछली सरकार के बीच प्रमुख अंतर बताया और कहा कि इस समय की सरकार भारत के लोगों की क्षमताओं में दृढ़ता से विश्वास करती है, जबकि पहले के वक्त सत्ता में रहने वाले लोग उनकी क्षमताओं के बारे में बहुत हद तक सशंकित थे। श्री राजनाथ सिंह ने रक्षा विनिर्माण में ‘आत्मनिर्भरता’ को बढ़ावा देने को वर्तमान सरकार द्वारा लाया गया सबसे बड़ा बदलाव करार दिया, जो भारत के रक्षा क्षेत्र को एक नया आकार दे रहा है।
उन्होंने आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए रक्षा मंत्रालय द्वारा उठाए गए सुधारात्मक कदमों का उल्लेख किया, जिनमें उत्तर प्रदेश व तमिलनाडु में रक्षा औद्योगिक गलियारों की स्थापना करना; सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों की अधिसूचना; पूंजीगत खरीद बजट का 75% घरेलू उद्योग के लिए आरक्षित करना; आयुध निर्माणी बोर्ड का निगमीकरण तथा रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार (आईडीईएक्स), आईडीईएक्स प्राइम, आईडीईएक्स (एडीआईटीआई) और प्रौद्योगिकी विकास निधि (टीडीएफ) के साथ नवोन्मेषी प्रौद्योगिकियों की इकाईयों का विकास जैसी योजनाएं/पहल शामिल हैं।
श्री राजनाथ सिंह ने इन निर्णयों के कारण रक्षा क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जो वार्षिक रक्षा उत्पादन वर्ष 2014 में लगभग 40,000 करोड़ रुपये था, वह अब रिकॉर्ड 1.10 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है। उन्होंने बताया कि रक्षा निर्यात आज 16,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो नौ-दस साल पहले मात्र 1,000 करोड़ रुपये ही था। रक्षा मंत्री ने इस तथ्य का भी उल्लेख किया कि सरकार ने 2028-29 तक 50,000 करोड़ रुपये का निर्यात हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि देश की जनता के दृष्टिकोण के अनुरूप ही सरकार द्वारा देश की रक्षा प्रणाली को एक नई ऊर्जा से प्रेरित किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके परिणामस्वरूप ही भारत एक सशक्त और आत्मनिर्भर सैन्य क्षमता के साथ वैश्विक मंच पर एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में उभरा है।
श्री सिंह ने कहा कि आज, केंद्र में एक शक्तिशाली नेतृत्व होने के कारण हमारी सेनाओं में दृढ़ इच्छा शक्ति है और हम अपने जवानों का मनोबल ऊंचा रखने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सैनिक भारत पर बुरी नजर डालने वाले किसी भी शक्ति या व्यक्ति को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए सुसज्जित, सक्षम और तैयार हैं।
श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार ने युवाओं पर भरोसा करते हुए और उनके नवाचार को बढ़ावा देते हुए निजी क्षेत्र को एक आदर्श वातावरण प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि यदि हमारे युवा प्रबुद्ध मस्तिष्क वाले युवा एक कदम आगे बढ़ाते हैं, तो हम 100 कदम बढ़ाकर उनकी मदद करेंगे। रक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया कि अगर युवा 100 कदम आगे बढ़ेंगे तो हम उन्हें 1,000 कदम आगे ले जाएंगे।
रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि जब प्रौद्योगिकी की बात आती है, तो विकासशील देशों के पास दो ही विकल्प होते हैं – ‘नवाचार’ और ‘नकल’, लेकिन भारत सरकार देश को नकल करने के बजाय प्रौद्योगिकी निर्माता बनाने पर विशेष जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि विकसित देशों की प्रौद्योगिकी से काम करना उन लोगों के लिए गलत नहीं है, जिनकी नवाचार क्षमता और मानव संसाधन नई प्रौद्योगिकियों के उत्पादन के लिए आवश्यक स्तर तक नहीं पहुंचे हैं।
श्री सिंह ने कहा कि यदि कोई राष्ट्र दूसरे देशों की तकनीक की नकल करता है, तब वह पुरानी तकनीक से ही आगे बढ़ता है; लेकिन यहां पर समस्या यह है कि व्यक्ति नकल करने का आदी हो जाता है और वह दोयम दर्जे की प्रौद्योगिकी को ही आगे बढ़ाता है। यह प्रक्रिया ही उन्हें एक विकसित देश से 20-30 साल पीछे चलने के लिए मजबूर करता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आत्मविश्वास खोना एक बड़ी समस्या है क्योंकि व्यक्ति हमेशा प्रौद्योगिकी का अनुयायी बना रहता है। यह मानसिकता आपकी संस्कृति, विचारधारा, साहित्य, जीवनशैली और दर्शन में आती है। रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी इस अनुयायी मानसिकता को गुलामी की मानसिकता कहते हैं।
श्री राजनाथ सिंह ने भारत को इस तरह की मानसिकता से बाहर निकालना सरकार, मीडिया और बुद्धिजीवियों का परम कर्तव्य बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस के संबोधन को याद करते हुए कहा कि श्री मोदी ने लोगों से गुलामी की मानसिकता को त्यागने और राष्ट्रीय विरासत पर गर्व महसूस करने की अपील की थी। रक्षा मंत्री ने कहा कि हमें दूसरों के बारे में ज्ञान होना चाहिए, लेकिन हमें अपनी राष्ट्रीय विरासत के बारे में भी जागरूक अवश्य होना चाहिए और इस पर गर्व महसूस करना चाहिए।
श्री राजनाथ सिंह ने औपनिवेशिक मानसिकता को समाप्त करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में भी जिक्र किया, जिसमें भारतीय दंड संहिता के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता की शुरूआत करना शामिल है। उन्होंने कहा कि हमने देश की संस्कृति में युवाओं का विश्वास बढ़ाया है और हमने भारत में भारतीयता को पुनः जागृत किया है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमारे विश्वास ने न केवल इतिहास को देखने के माध्यम को बदल दिया, बल्कि आईआईटी और आईआईएम के साथ-साथ भारत के अन्य प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले युवाओं के सपनों को भी फिर से आशान्वित किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा विदेशों में अपने लिए अवसर की तलाश करने के बजाय आज देश के भीतर स्टार्ट-अप और नवाचार के माध्यम से भारतीय अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदियों से भारतीय संस्कृति में प्रचलित सैन्य शक्ति और आध्यात्मिकता के बीच सामंजस्य का उल्लेख करते हुए इस बात पर जोर दिया कि सरकार सेवारत तथा सेवानिवृत्त कर्मियों के साथ-साथ उन लोगों की बेहतरी के लिए लगातार काम कर रही है, जिन्होंने अपने परिवार सहित देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि सशस्त्र बलों को नवीनतम अत्याधुनिक हथियारों/प्लेटफार्मों के साथ आधुनिक बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमने देश के बहादुरों के बलिदान का सम्मान करने के लिए नई दिल्ली में राष्ट्रीय समर स्मारक की स्थापना की है। श्री राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि इसके अलावा, हमने वन रैंक वन पेंशन योजना लागू की, जो पूर्व सैनिकों की लंबे समय से लंबित मांग थी।

 

 

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